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NPS और PPF मे क्या अंतर है

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  मेरे पास कुछ मेल आये है जिसमे यह पुछा गया है कि हम PPF और NPS मे से कौन सा ले । तो इसके लिए सबसे पहते हम समझते है कि ये क्या है ? PPF - Public Provident Fund -  हम यह जानते है कि सरकारी कर्मचारी का GPF अर्थात एक फंड होता है जिसमे की कर्मचारी के वेतन का 12% ( बेसिक) कटता है जिसके उपर बेंक एफ डी से ज्यादा ब्याज मिलता है और रिटायरमेंट के समय एकमुश्त राशि मिल जाती है । वैसे ही प्राइवेट कर्मचारी के लिए EPF होता है । लेकिन आम नागरिक के लिए एसा कुछ नही था । इसलिए गोवर्मेंट ने एक पब्लिक के लिय फंड बनाया जिसका नाम PPF है जिसमे कोई भी व्यक्ति पैसा जमा कर सकता है, और 15 वर्ष के बाद पुरा पैसा ले सकता है । अर्थात यह लम्बे समय का निवेश है । इसमे कुछ बाउंडेशन है जैसे कि 15 वर्ष के पहले आप पैसे नही निकाल सकते । यदि आपको आवश्यक हो तो 3 से 5 वर्ष के बीच आप लोन ले सकते है लेकिन वह दुसरे साल के 25% के बराबर ही मिलेगा । यदि 5 वे साल तक आप पहले का लोन पुरा कर देते है तो 6 वे वर्ष फिर से लोन ले सकते है । 6 वर्ष के पुर्ण होने के बाद आप 50% पैसा निकाल सकते है । इसका ब्याज हर वर्ष फाइनेंस मिनिस्ट्री ...

Saving और Investment मे क्या अंतर है ?

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हम अधिकांशत: दो शब्द सुनते है एक सेविंग और एक इनवेस्ट्मेंट । आखिर क्या है इनमे अंतर, इसे हम समझते है । सेविंग (Saving या बचाना) - सेविंग के अंदर आपके द्वारा बचाया हुआ पैसा या तो आपके पास होता है या उसे फिक्स डिपोसिट मे नियत ब्याज पर जमा किया जाता है । अर्थात उसके कम होने की सम्भावना नही होती है और न ही वह ज्यादा बढ्ता  है । इंवेस्ट्मेंट (Investment या निवेश) - इंवेस्ट्मेंट के अंदर आप अपना पैसा कही लगाते हो जैसे कि प्लाट खरिदना, शेयर खरीदना, म्युचल फंड मे लगाना, मकान खरीदना, आदि । इसके अंदर लगाया हुआ पैसा  कुछ वर्षो के बाद या तो ज्यादा या कम भी हो सकता है ।  उदाहरण के लिए आपने किसी एक जगह प्लाट खरिदा, कुछ वर्षो के बाद उस जगह पर ज्यादा डेवलपमेंट हो गया आपके प्लाट के भाव चार गुना हो गये इसके विपरित उस जगह पर कोई डेवलपमेंट नही हुआ और आपके प्लाट कोई लेने वाला भी नही है तो आपने जितने मे खरिदा उससे कम मे बेचना पड गया या फिर उसके बडने का इंतजार करना पडा । बस इसे ही कहते है इंवेस्ट्मेंट या निवेश। जिस तरह हमे प्लाट लेते समय उस जगह के भविष्य के बारे मे जानना जरुरी है वैसे ही  ...

NFO क्या है ?

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  जब कोई म्युचल फंड कम्पनी नया म्युचल फंड लांच करना चाहती है तो उसे लांच करने के पहले एक आफर निकालती है जिसे NFO (New Fund Offer) कहते है ।  इसका प्रारम्भिक मुल्य जिसे NAV (Net Asset Value) कहा जाता है वह 10 रुपये से शुरु होता है । इसमे कम से कम 1000 से 5000  रुपये का इंवेस्ट्मेंट जरुरी होता है वह फंड पर निर्भर करता है ।  यह  IPO से अलग है  इसमे आपको म्युचल फंड   अधिकाशत: मिल ही जाते है ।  जबकि  IPO मे एसा नही होता है । (IPO की डिटेल के लिये IPO क्या है ?   👈     क्लिक करे । अब प्रश्न यह है कि क्या इसे लेना फायदेमंद है ? यह तो उस फंड पर निर्भर करता है सभी फंड का NFO  फायदेमंद नही होता है । लेकिन कुछ फंड बहुत ज्यादा रिटर्न देते है इसलिए फंड का चुनाव किसी एक्सपर्ट से करवाय । जो म्युचल फंड पहले से चल रहे होते है उसका आप पिछला रिकार्ड देखकर अंदाजा लगा सकते है लेकिन यह एक्दम नया फंड होता है इसलिय इसका कोइ पिछला रिकार्ड होता ही नही है ।     

QR Code कितना सुरक्षित (safe) है ?

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  मेरे पास एक कमेंट आया कि क्या QR कोड सुरक्षित (safe) है ?  और QR कोड से समान पेमेंट प्राप्त करने पर भेजने वाले का कैसे पता चलता है । तो सबसे पहले हम यह जाने कि QR कोड क्या है । 

मेडिक्लेम / हेल्थ इंसुरेंश (Mediclaim/Health Insurance) क्या है ।

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  सबसे पहले तो यह जान लेते है कि मेडिक्लेम बिमा पालिसी या हेल्थ बिमा पालिसी क्या है ?   मेडिक्लेम / हेल्थ पोलिसी एक बीमा (Insurance)   है जिसमे आपके अस्पताल (Hospital) का खर्चा एक निश्चित राशी तक बिमा कम्पनी द्वारा उठाया   जाता है   और इसके लिय आपको प्रति वर्ष कुछ पैसा देना होता है जिसे प्रिमियम कहते है। मेडिक्लेम और हेल्थ बिमा मे अंतर यह है कि   हेल्थ बिमा मे अस्पताल मे एडमिट होने के पहले और बाद के इलाज का खर्च भी दिया जाता है जबकि मेडिक्लेम मे केवल अस्पताल का खर्च दिया जाता है । यह एक अकले व्यक्ति या पुरे परिवार का होता है । इसे पुरे परिवार का ही लेना चाहिये । इसका प्रिमियम 80 D के अंतर्गत ₹ 25000/- तक इनकम टेक्स मे छुट मिलती है । ध्यान रहे मेडिक्लेम/हेल्थ बीमा भी तीन प्रकार का होता है , बीमा लेते समय अवश्य ध्यान दे : एक्सीडेंटल मेडिक्लेम   बीमा –   इसके अंतर्गत आपको एक्सीडेंट होने से अस्पताल मे भर्ती होने पर ही दिया जाता है । नार्मल रुप से बीमार होने पर नही दिया जाता है । इसकी प्रिमीयम थोडी कम होती है इसलिये अधिकांश लोग इसे समझे ब...

इलेक्ट्रीक कार / बाइक Electric Car /Bike खरीदे या नही

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  कार खरीदना हो या बाइक , आजकल जिस तरह से पेट्रोल की किमत बढ्ते जा रही है , एक दुसरा आप्शन हर एक व्यक्ति चाहता है । आज के समय मे इलेक्ट्रीक वाहन एक सबसे अच्छा आप्शन है पर क्या इसे लेना फायदे का सौदा होगा   ? इसमे कुछ लाभ और कुछ हानी भी है , चलिये इसको समझते है : लाभ – ·         वाहन चलाने का खर्च लगभग 1 रुपये किमी ही आएगा । ·         वाहन की सविसिंग की आवश्यकता ही नही होती क्योकि उसमे आइल लगता   ही नही है । ·         सामान्य वाहन के तुलना मे इसमे जगह (space) ज्यादा होती   है । ·         प्रदुषण (Pollution) बिल्कुल नही होता । हानी – ·         इलेस्ट्रीक वाहन   की किमत सामान्य कार की किमत से 40% से 50% ज्यादा होती है । ·         वाहन एक बार फुल चार्ज करने के बाद बहुत कम रेंज (100-150 किमी) ही चल पाता है और उसे चार्ज करने के लिय समय लगता ह...

बिजनेस Business कौन सा करे ..

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  मेरे पास बहुत से मेल आये है कि सर आप बिजिनेस के बारे मे बताए । बिजनेस के बारे मे यह तो हम सभी जानते है कि बिजनेस मे अनलिमिटेड पैसा कमाने का अवसर होता है जबकि जाब मे फिक्स्ड इनकम होती है । पहले यह जान ले कि इनकम दो प्रकार की होती है : एक्टिव इनकम – इसके अंतर्गत जब तक आप काम करते है तब तक इनकम होती है आपके काम न करने पर इनकम बंद हो जाती   जैसे कोइ जाब करना या दुकान खोलना , आदि । दुकान खोलना बिजनेस नही है वह सेल्फ एम्प्लाई की श्रेणी मे आता है । पेसिव इनकम - इसके अंतर्गत आपको पर्सनली काम करने की जरुरत नही होती है जैसे कोइ फेक्ट्री खोलना , प्रापर्टी किराये पर देना , आदि   । सबसे पहले यह समझिये कि चार प्रकार के लोग हो सकते है : स्टुटेंड – कालेज से अभी अभी ही पासाउट हुआ हो – अधिकांश बच्चे जब अपनी कालेज की पढाई पुरी कर लेते है तो उनके मन मे बिजनेस करने का विचार आता है । पहले उन्हे कुछ साल किसी अच्छी कम्पनी मे जाब करना चाहिए । जाब करने से उसमे सेल्फ डिसिप्लीन आता है और बिजिनेस की प्रोसेस को अच्छी तरह समझ पाते है । जाब करने वाला – जो अभी किसी कम्पनी मे कार्य कर रहा...